घर-घर गया पर अब कहीं हैवानियत न रही
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घर-घर गया पर अब कहीं हैवानियत न रही
इंसान ख़ुश हैं क्योंकि अब इंसानियत न रही
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घर-घर गया पर अब कहीं हैवानियत न रही
इंसान ख़ुश हैं क्योंकि अब इंसानियत न रही
Ghar-ghar gaya par ab kaheen haivaaniyat na rahee,
Insaan khush hain kyonki ab insaaniyat na rahee !!
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
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ससुरः बेटा मेरे बारे में सोचो.. मेरे...
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Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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