ग़ैर मुमकिन है तेरे घर के गुलाबों का शुमार
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ग़ैर मुमकिन है तेरे घर के गुलाबों का शुमार,
मेरे रिसते हुए ज़ख़्मों के हिसाबों की तरह।
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ग़ैर मुमकिन है तेरे घर के गुलाबों का शुमार,
मेरे रिसते हुए ज़ख़्मों के हिसाबों की तरह।
Gair Mumkin Hai Tere Ghar Ke Gulabon Mein Shumar,
Mere Risate Huye Zakhmo Ke Hisaabon Ki Tarah.
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