मजा तो तब था दिल्लगी का
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मजा तो तब था दिल्लगी का,
आग बराबर लगती,
न तुम्हें क़रार होता
और न हमें क़रार होता।
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मजा तो तब था दिल्लगी का,
आग बराबर लगती,
न तुम्हें क़रार होता
और न हमें क़रार होता।
Mazaa Toh Tab Tha Dillagi Ka,
Aag Barabar Lagti,
Na Tumhein Qaraar Hota
Aur Na Humein Qaraar Hota.
