कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़
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कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़,
अगर बैठ कर सोचूंगा तो क्या उखाड़ लूँगा।
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कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़,
अगर बैठ कर सोचूंगा तो क्या उखाड़ लूँगा।
Kabhi Kabhi Let Kar Main Sochta Hoon Faraz,
Agar Baith Kar Sochunga Toh Kya Ukhaad Lunga.
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
दामाद ससुर सेः पापाजी आपकी लाडली ने नाक में दम कर रखा है..!
ससुरः बेटा मेरे बारे में सोचो.. मेरे...
Today's Status
Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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