कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़
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कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़,
अगर बैठ कर सोचूंगा तो क्या उखाड़ लूँगा।
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कभी कभी लेट कर मैं सोचता हूँ फ़राज़,
अगर बैठ कर सोचूंगा तो क्या उखाड़ लूँगा।
Kabhi Kabhi Let Kar Main Sochta Hoon Faraz,
Agar Baith Kar Sochunga Toh Kya Ukhaad Lunga.
