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Tarbuj Shayari

Kabhi bichhadne ka gam, kabhi garmi ka mazedaar mazaak - dono tarbuj mein.

Tarbuj shayari mein juda hone ke gam ko itna gehra dikhaya gaya hai ki tarbuj bhi andar se rang khokar safed nikalta hai, ek mazedaar aur bhavuk andaaz mein. Isi andaaz mein Haalaat shayari bhi padhein.

तुम्हारे जाने से चला गया है जीवन से प्रेम का रंग
आज तरबूज भी अंदर से सफेद निकला !!

Tumhaare jaane se chala gaya hai jeevan se prem ka rang !!
Aaj tarbuj bhee andar se saphed nikala !!

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इस गर्मी की वजह से हालात ऐसे हो गये हैं कि ..
आजकल तजुरबा लिखा हुआ भी पड़ने में तरबूजा ही आता है।

Is garmee kee vajah se haalaat aise ho gaye hain ki ..
Aajakal tajuraba likha hua bhee padane mein tarabooja hee aata hai.

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Frequently Asked Questions

'तरबूज' शायरी कलेक्शन में इतना अनोखा टॉपिक क्यों चुना गया है?
यह कलेक्शन तरबूज को एक चुटीले और भावुक रूपक के तौर पर इस्तेमाल करता है। जैसे लिखा है, 'तुम्हारे जाने से चला गया है जीवन से प्रेम का रंग, आज तरबूज भी अंदर से सफेद निकला' — यहां तरबूज के अंदर के रंग को भी भावनात्मक खालीपन से जोड़ा गया है। Jeevan कलेक्शन में जीवन से जुड़ी और गहरी शायरियां मिलेंगी।
क्या इसमें गर्मी के मौसम पर कोई मज़ेदार शायरी भी है?
हां, एक हल्की-फुल्की और मज़ाकिया पंक्ति कहती है, 'इस गर्मी की वजह से हालात ऐसे हो गये हैं कि.. आजकल तजुरबा लिखा हुआ भी पड़ने में तरबूजा ही आता है' — यह गर्मी के असर पर एक चुटीला मज़ाक है। ऐसी ही मौजूदा हालातों वाली शायरियों के लिए Haalaat कलेक्शन देखें।
यह तरबूज शायरी संग्रह किस अंदाज़ में लिखा गया है?
यह कलेक्शन भावुक और हास्य दोनों अंदाज़ मिलाकर लिखा गया है — एक तरफ बिछड़ने का दर्द, दूसरी तरफ गर्मी पर हल्का मज़ाक। आज के हालातों से जुड़ी और शायरियों के लिए Aaj कलेक्शन भी पढ़ें।

Doosra sher garmi ke halaat par ek halka mazaak karta hai ki ab tajurba shabd bhi padhne mein tarbuja hi lagta hai. Aage Aaj aur 2 Line shayari bhi padhein.