फर्क अनमोल वचन
असली फर्क आपकी अपनी नजर से पड़ता है।
कांच और भरोसा दोनों बेहद नाजुक होते हैं, फिर भी दोनों के बिखरने की वजह जुदा होती है - एक हादसे से, दूसरा गलतफहमी से। यही महीन भेद इन वचनों की गहराई बताता है। जुड़े भाव Galti में भी मिलते हैं।
शीशा और रिश्ता बड़े ही नाज़ुक होते हैं लेकिन दोनों में एक फर्क ज़रूर होता है, शीशा गलती से टूटता है और रिश्ता गलतफहमी से।
Sheesha aur rishta bada hi nazuk hote hain, lekin dono me ek bada farq jarur hota hai, sheesha galati se toot ta hai aur rishta galatfahmi se.
असल में माॅं-बाप को लात मारने की प्रथा
औलाद माॅं के पेट से ही शुरू कर देती है,
बस फर्क इतना है कि…
पेट में लात खा के माॅं-बाप फूले नहीं समाते,
लेकिन बुढ़ापे में लात पड़ने पर आंसु रोक...
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कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग आपके बारे में क्या सोचते है, फर्क तो इससे पड़ता है की आप अपने बारे में क्या सोचते है ।
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Frequently Asked Questions
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लोग आपको लेकर क्या राय रखते हैं, उससे कुछ नहीं बदलता - मायने तो यह रखता है कि आप खुद अपनी नजर में कैसे हैं। यही सकारात्मक नजरिया Sakaratmak से जुड़े वचनों में भी दिखता है।
