आत्मा अनमोल वचन
गुरु से मिलती है आत्मा को राह।
यह आत्मा अनमोल वचन गुरु पूर्णिमा के मौक़े पर लिखी उस भावना को दर्शाता है, जिसमें ज्ञान और आत्मा दोनों की नींव गुरु के मार्गदर्शन में टिकी बताई गई है। संयम, समझ और कर्तव्य से जुड़ा हर पहलू इसी शिक्षा की देन माना गया है। इससे मिलते-जुलते भाव Dhyan से जुड़े वचनों में भी हैं।
गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन है।
गुरु पूर्णिमा की शुभ कामनायें!
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Frequently Asked Questions
यह वचन आत्मा से किस तरह जुड़ा है?
यह वचन सीधे तौर पर बताता है कि गुरु के बिना ज्ञान नहीं और ज्ञान के बिना आत्मा नहीं मिलती। यानी आत्मज्ञान की यात्रा गुरु से होकर ही पूरी होती है।
इस वचन में गुरु का महत्व क्यों बताया गया है?
वचन के अनुसार ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म ये सभी गुरु की ही देन हैं। यह गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला वचन है।
