ज़बाँ तक जो न आए वो मोहब्बत और होती है
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ज़बाँ तक जो न आए, वो मोहब्बत और होती है...
फ़साना और होता है, हक़ीक़त और होती है...!!
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ज़बाँ तक जो न आए, वो मोहब्बत और होती है...
फ़साना और होता है, हक़ीक़त और होती है...!!
Zabaan tak jo na aae, vo mohabbat aur hotee hai...
Fasaana aur hota hai, haqeeqat aur hotee hai...!!
