जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से
Popular Shayari Topics for You.
जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से,
कि जिन पे बोझ डाला हो, वो कंधे याद रखता हूँ।
feelthewords.com
जरा सा हट के चलता हूँ ज़माने की रिवायत से,
कि जिन पे बोझ डाला हो, वो कंधे याद रखता हूँ।
Jara Sa Hat Ke Chalta Hoon Zamane Ki Riwayat Se,
Ke Jinpe Bojh Dala Ho Woh Kandhe Yaad Rakhta Hoon.
