कोई हाथ भी न मिलाएगा
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कोई हाथ भी न मिलाएगा,
जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिजाज का शहर है,
जरा फ़ासले से मिला करो।
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कोई हाथ भी न मिलाएगा,
जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिजाज का शहर है,
जरा फ़ासले से मिला करो।
Koyi Haath Bhi Na Milayega,
Jo Gale Miloge Tapaak Se,
Ye Naye Mizaaz Ka Shahar Hai,
Zara Faasle Se Mila Karo.
