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Dhanteras Wishes

Dhanteras wishes invoking Lakshmi and Dhanvantari's blessings

Dhanteras opens the Diwali festivities with prayers to Goddess Lakshmi and Lord Dhanvantari for health, wealth, and prosperity in the year ahead. These wishes carry that same blessing forward.

इस धनतेरस पर धन स्वास्थ्य खुशहाली की बरसात हो

इस धनतेरस पर आपके जीवन में धन, स्वास्थ्य और खुशहाली की बरसात हो। शुभ धनतेरस!

Is Dhanteras par aapke jeevan me dhan, swasthya aur khushaali ki barsaat ho. Shubh Dhanteras!

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नई शुरुआत नई खरीदारी नई खुशियाँ धनतेरस मंगलमय हो

नई शुरुआत, नई खरीदारी, नई खुशियाँ - धनतेरस का यह पावन पर्व आपके लिए मंगलमय हो।

Nayi shuruaat, nayi kharidari, nayi khushiyan - Dhanteras ka yeh paavan parv aapke liye mangalmay ho.

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धनतेरस पर घर में सोने चांदी जैसी चमक रहे

धनतेरस के इस शुभ अवसर पर आपके घर में सोने-चांदी जैसी चमक और लक्ष्मी जी का वास सदा बना रहे।

Dhanteras ke is shubh avsar par aapke ghar me sone-chandi jaisi chamak aur Lakshmi ji ka vaas sada bana rahe.

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भगवान धन्वंतरि दें उत्तम स्वास्थ्य लक्ष्मी दें समृद्धि

भगवान धन्वंतरि आपको उत्तम स्वास्थ्य दें और माँ लक्ष्मी सुख-समृद्धि - धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Bhagwan Dhanvantari aapko uttam swasthya de aur Maa Lakshmi sukh-samriddhi - Dhanteras ki hardik shubhkamnaye.

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Good Morning Wishes

धनतेरस की शुभकामनाएं माँ लक्ष्मी की कृपा रहे

धनतेरस की शुभकामनाएं! माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा आप पर सदैव बनी रहे, घर में सुख-समृद्धि का वास हो।

Dhanteras ki shubhkamnaye! Maa Lakshmi aur Bhagwan Dhanvantari ki kripa aap par sadaiv bani rahe, ghar me sukh-samriddhi ka vaas ho.

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Frequently Asked Questions

धनतेरस की शुभकामनाओं में आमतौर पर किन देवताओं का आशीर्वाद मांगा जाता है?
माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि दोनों का, क्योंकि यह पर्व धन और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा है, जैसे "धनतेरस की शुभकामनाएं! माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा आप पर सदैव बनी रहे, घर में सुख-समृद्धि का वास हो।" यह एक पूर्ण औपचारिक शुभकामना संदेश है जो परिवार, रिश्तेदार या सहकर्मियों को भेजा जा सकता है।
धनतेरस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस (धनत्रयोदशी) दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है, जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन धन्वंतरि जयंती के रूप में भी जाना जाता है, जब समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन घरों में देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। त्योहार की खुशियां बांटने के लिए लोग एक-दूसरे को Wishes भेजते हैं।
धनतेरस की शुभकामनाएं किसे भेजी जाती हैं?
आमतौर पर परिवार के बड़ों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कभी-कभी ऑफिस के सहकर्मियों को भी भेजी जाती हैं, क्योंकि यह संदेश औपचारिक और सम्मानजनक टोन में होता है, जो हर रिश्ते के लिए उपयुक्त रहता है।
धनतेरस पर नए बर्तन, सोना-चांदी खरीदने की परंपरा क्यों है?
मान्यता है कि धनतेरस पर नई धातु की वस्तु — विशेष रूप से सोना, चांदी या पीतल के बर्तन — खरीदने से घर में सालभर धन-समृद्धि बनी रहती है। यह प्रथा धन्वंतरि के अमृत कलश (जो एक धातु पात्र था) की कथा से भी जुड़ी है, इसलिए धातु खरीदना शुभ माना गया। कई परिवार इसी दिन साल भर के लिए बर्तन या आभूषण की खरीदारी की योजना पहले से बना लेते हैं।
अगर छोटा या तुकबंदी वाला संदेश चाहिए तो क्या विकल्प है?
छोटे संदेश के लिए Status पेज देखें, और अगर तुकबंदी में भेजना चाहें तो Shayari सेक्शन भी उपलब्ध है।
धनतेरस से जुड़ी यम दीपक और राजकुमार की कथा क्या है?
एक प्रचलित लोककथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। उसकी नवविवाहित पत्नी ने उस रात घर के मुख्य द्वार पर ढेर सारे दीये जलाकर सोने के आभूषण और सिक्कों का ढेर लगा दिया तथा सारी रात कथा-गीत सुनाकर पति को जगाए रखा। जब यमराज सर्प रूप में वहां पहुंचे तो दीयों की चमक और आभूषणों की चकाचौंध से अंधे होकर लौट गए। इसी कथा की स्मृति में धनतेरस की शाम घर के बाहर यम दीपक जलाने की परंपरा है।
धनतेरस किस तारीख को मनाई जाती है, और तिथि हर साल क्यों बदलती है?
धनतेरस हिंदू पंचांग पर आधारित पर्व है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख हर वर्ष बदलती रहती है — यह कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी तिथि पर, दिवाली से दो दिन पहले पड़ती है। आगामी धनतेरस 6 नवंबर 2026 को संभावित है, हालांकि चंद्र पंचांग के अनुसार यह तिथि आगे-पीछे भी हो सकती है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहता है।
धनतेरस पर कौन-सी रस्में और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं?
घरों और दुकानों की साफ-सफाई व रोशनी से सजावट, मुख्य द्वार पर रंगोली और दीये, शाम को लक्ष्मी-कुबेर-धन्वंतरि की पूजा, नई वस्तुओं की खरीदारी और परिवार-मित्रों के बीच शुभकामनाओं का आदान-प्रदान — ये सब धनतेरस की पारंपरिक रस्में हैं। बहुत से लोग इस मौके पर एक-दूसरे को हार्दिक Quotes और भावपूर्ण Shayari भेजकर त्योहार की गर्माहट साझा करते हैं।
धनतेरस मनाने में क्षेत्रीय भिन्नता कैसी देखने को मिलती है?
उत्तर भारत में धनतेरस मुख्यतः बर्तन और आभूषण खरीदने तथा घर की पूजा तक सीमित है, जबकि पश्चिम भारत — विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र के व्यापारिक समुदायों — में यह नए बहीखातों (लेखा-बही) की शुरुआत और प्रतिष्ठानों की विशेष पूजा से जुड़ा है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इसे धन्वंतरि त्रयोदशी के रूप में अधिक धार्मिक-आध्यात्मिक भाव से मनाया जाता है, जबकि मूल भावना — समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना — हर जगह एक जैसी बनी रहती है।

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