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Eid al-Adha Quotes

Duas of sacrifice, faith and gratitude.

This Eid al-Adha page carries a dua wishing loved ones a life as bright as the Eid moon, fitting for the gratitude that marks Bakrid. Browse our Wishes for full greetings.

दिए जलते और जगमगाते रहें,
हम आपको इसी तरह याद आते रहें,
जब तक ज़िंदगी है ये दुआ है हमारी,
आप ईद के चाँद की तरह जगमगाते रहें !!

Diye jalte aur jagmagate rahen,
Hum aapko is tarah yaad aate rahen !!
Jab tak zindagee hai ye dua hai hamaaree,
Aap eed ke chaand kee tarah jagamagaate rahen !!

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Frequently Asked Questions

ईद उल-अज़हा को "कुर्बानी की ईद" क्यों कहा जाता है और इसकी धार्मिक बुनियाद क्या है?
इस्लामी मान्यता के अनुसार पैग़म्बर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को सपने में अपने बेटे इस्माईल की कुर्बानी देने का हुक्म मिला था, और जब उन्होंने अल्लाह के प्रति अपनी संपूर्ण आज्ञाकारिता दिखाते हुए यह करने की तैयारी की, तो अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक मेढ़े की कुर्बानी कबूल कर ली। ईद उल-अज़हा इसी बेमिसाल त्याग और समर्पण की याद में मनाई जाती है।
ईद-उल-अज़हा किस मौके का त्योहार है और इसके कोट्स में क्या झलकता है?
ईद-उल-अज़हा हज की तकमील और हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। जैसे इस मशहूर पंक्ति में कहा गया है: "दिए जलते और जगमगाते रहें, हम आपको इसी तरह याद आते रहें, जब तक ज़िंदगी है ये दुआ है हमारी, आप ईद के चाँद की तरह जगमगाते रहें !!" - चाँद और दुआ की यह भावना ईद-उल-अज़हा पर भी उतनी ही असरदार लगती है, भले ही इसका मूल मक़सद हज और कुर्बानी की याद है।
2027 में ईद उल-अज़हा किस तारीख़ के आसपास पड़ने की उम्मीद है?
चांद दिखने पर आधारित हिजरी कैलेंडर के अनुसार 2027 में ईद उल-अज़हा 17 मई के आसपास पड़ सकती है, हालांकि असली तारीख़ का एलान चांद दिखने की पुष्टि के बाद ही होता है और यह एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
ईद-उल-अज़हा को 'बकरीद' या 'बकरा ईद' भी क्यों कहा जाता है?
भारत और पाकिस्तान में यह त्योहार बोलचाल में 'बकरीद' या 'बकरा ईद' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि परंपरा के अनुसार इस दिन कुर्बानी दी जाती है। लेकिन इस्लामी कैलेंडर में इसका औपचारिक नाम 'ईद-उल-अज़हा' ही है। इस्लामी नए साल से जुड़े मौके के लिए अल-हिज्र कोट्स भी देखे जा सकते हैं।
कुर्बानी की रस्म में मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा का क्या मतलब है?
परंपरा के अनुसार कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है - एक हिस्सा अपने परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और तीसरा ज़रूरतमंदों तथा ग़रीबों के लिए। यह बंटवारा त्याग की भावना को समाज सेवा से जोड़ता है।
इसी मौके पर शायरी या स्टेटस के लिए क्या विकल्प हैं?
अगर आप भावुक अंदाज़ में लंबी पंक्तियाँ चाहते हैं तो ईद-उल-अज़हा शायरी देखें, यह छोटे कोट्स से अलग एक विस्तृत अनुभव देती है।
ईद उल-अज़हा का हज यात्रा से क्या संबंध है?
ईद उल-अज़हा ज़ुल-हिज्जा महीने की 10 तारीख़ को, हज यात्रा के समापन के आसपास मनाई जाती है। जो मुसलमान मक्का नहीं पहुंच पाते, वे भी दुनियाभर में अपने-अपने शहरों में यही कुर्बानी और इबादत करते हैं ताकि हज करने वालों के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव बना रहे।
इस दिन नमाज़ और सामाजिक जिम्मेदारी को कैसे जोड़ा जाता है?
सुबह ईद की विशेष नमाज़ अदा करने के बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है, और इसके तुरंत बाद ग़रीबों तक गोश्त पहुंचाने का काम शुरू हो जाता है, ताकि इबादत के साथ-साथ समाज के कमज़ोर वर्ग की मदद भी हो सके।
लोग ईद उल-अज़हा की गंभीरता और खुशी दोनों को कैसे व्यक्त करते हैं?
बहुत से लोग इस पावन मौक़े पर धार्मिक भाव से भरी Quotes और Shayari साझा करते हैं, तो कुछ अपनों को दिल से Wishes भेजकर त्याग और समर्पण की इस भावना को याद करते हैं।

Pair a quote here with a family gathering photo or a sacrifice-day message. If you're marking the Islamic new year too, see our Al-Hijra quotes.