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Chehlum (Arbaeen) Wishes

Solemn Arbaeen wishes honoring sacrifice and truth

Chehlum, or Arbaeen, marks forty days after Ashura and honors Imam Hussain's sacrifice at Karbala for truth and justice. These wishes reflect that same solemn, reflective spirit.

कर्बला की याद में झुका हर सिर सच्चाई को सलाम करता है

कर्बला की याद में झुका हर सिर, सच्चाई और इंसाफ के रास्ते को सलाम करता है।

Karbala ki yaad me jhuka har sir, sachchai aur insaaf ke raaste ko salaam karta hai.

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अरबईन की यात्रा सिखाती है सच्चाई की राह वाले अकेले नहीं

अरबईन की यह पावन यात्रा सिखाती है कि सच्चाई की राह पर चलने वाले कभी अकेले नहीं होते।

Arbaeen ki yeh paavan yatra sikhaati hai ki sachchai ki raah par chalne waale kabhi akele nahi hote.

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इमाम हुसैन का बलिदान इंसाफ की मशाल जलाता रहेगा

इमाम हुसैन का महान बलिदान हर दौर में इंसाफ और सच्चाई की मशाल जलाता रहेगा।

Imam Hussain ka mahaan balidaan har daur me insaaf aur sachchai ki mashaal jalaata rahega.

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Frequently Asked Questions

चेहलुम क्या है और इस दिन किस तरह के संदेश साझा किए जाते हैं?
चेहलुम (अरबईन) कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के चालीस दिन बाद मनाया जाने वाला स्मरण दिवस है; इस दिन खुशी के नहीं बल्कि श्रद्धा और सम्मान के संदेश भेजे जाते हैं, जैसे "चेहलुम के इस पावन मौके पर इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान कुर्बानी को शत-शत नमन।"
चेहलुम (अरबईन) क्या है और यह किस घटना से जुड़ा है?
चेहलुम, जिसे अरबईन भी कहा जाता है, इमाम हुसैन की शहादत के चालीस दिन बाद मनाया जाने वाला शोक दिवस है। यह कर्बला की घटना से जुड़ा है, जहां इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अत्याचार के विरुद्ध बलिदान दिया था।
इस दिन संदेश भेजने का क्या मकसद है?
यह दिन बलिदान और सच्चाई की राह पर चलने की सीख को याद रखने का है, इसलिए लोग एक-दूसरे को यह संदेश भेजकर इमाम हुसैन की कुर्बानी के प्रति अपनी श्रद्धा और नमन व्यक्त करते हैं।
इसकी तारीख हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्यों बदलती रहती है?
चेहलुम इस्लामी हिजरी (चंद्र) कैलेंडर की सफ़र माह की 20 तारीख को पड़ता है, और चूंकि हिजरी कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। चांद दिखने पर आधारित होने के कारण सटीक तारीख में एक दिन का अंतर भी संभव है।
क्या चेहलुम पर श्रद्धांजलि के लिए और कंटेंट भी है?
हां, यदि आप कुछ और शब्दों में श्रद्धांजलि व्यक्त करना चाहें तो हमारा Quotes कलेक्शन भी देख सकते हैं।
शिया मुसलमान इस दिन को किस तरह याद करते हैं?
दुनियाभर में, विशेषकर इराक के कर्बला शहर में, लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके इमाम हुसैन के रौज़े तक पहुंचते हैं। मजलिसों (शोक सभाओं) का आयोजन होता है जिनमें कर्बला की घटना को याद किया जाता है, और लोग एक-दूसरे को श्रद्धांजलि स्वरूप Wishes भेजते हैं।

For more reflective lines on this occasion, see our Quotes collection alongside these wishes.