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Chehlum Quotes

Most Famous Chehlum Quotes of All Time!

We have created a collection of some of the best chehlum quotes so you can read and share anytime with your friends and family.

कर्बला सिर्फ एक जगह का नाम नहीं, बलिदान और साहस की एक अमर मिसाल है।

Karbala sirf ek jagah ka naam nahi, balidaan aur saahas ki ek amar misaal hai.

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जो जुल्म के आगे नहीं झुके, वही तारीख में असली मिसाल बन जाते हैं - यही है इमाम हुसैन की विरासत।

Jo julm ke aage nahi jhuke, wahi taareekh me asli misaal ban jaate hain - yahi hai Imam Hussain ki viraasat.

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यह चालीस दिनों का मातम भी एक कर्ज है, जो सदियों से पूरी अकीदत के साथ निभाया जा रहा है।

Yeh chaalis dinon ka maatam bhi ek karz hai, jo sadiyon se poori aqeedat ke saath nibhaya jaa raha hai.

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इमाम हुसैन ने सिखाया कि सच्चाई और इंसाफ के लिए सब कुछ कुर्बान किया जा सकता है।

Imam Hussain ne sikhaya ki sachchai aur insaaf ke liye sab kuch qurbaan kiya jaa sakta hai.

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Frequently Asked Questions

चेहलुम (अरबईन) क्या है और यह किस घटना से जुड़ा है?
चेहलुम, जिसे अरबईन भी कहा जाता है, इमाम हुसैन की शहादत के चालीस दिन बाद मनाया जाने वाला शोक दिवस है। यह कर्बला की घटना से जुड़ा है, जहां इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अत्याचार के विरुद्ध बलिदान दिया था।
चहलुम कोट्स में किस भावना को दर्शाया गया है?
ये लाइनें इमाम हुसैन के त्याग, सच्चाई और इंसाफ के संदेश को श्रद्धा के साथ याद करती हैं, जैसे कहा गया है, 'इमाम हुसैन ने सिखाया कि सच्चाई और इंसाफ के लिए सब कुछ कुर्बान किया जा सकता है।'
इसकी तारीख हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्यों बदलती रहती है?
चेहलुम इस्लामी हिजरी (चंद्र) कैलेंडर की सफ़र माह की 20 तारीख को पड़ता है, और चूंकि हिजरी कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। चांद दिखने पर आधारित होने के कारण सटीक तारीख में एक दिन का अंतर भी संभव है।
चहलुम (अरबईन) कोट्स शेयर करने का उचित तरीका क्या है?
यह अशूरा के चालीस दिन बाद मनाया जाने वाला शोक और श्रद्धा का अवसर है, इसलिए इन्हें गंभीर लहजे में, मजलिस या स्मरण सभाओं के संदर्भ में साझा करना उपयुक्त रहता है।
शिया मुसलमान इस दिन को किस तरह याद करते हैं?
दुनियाभर में, विशेषकर इराक के कर्बला शहर में, लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके इमाम हुसैन के रौज़े तक पहुंचते हैं। मजलिसों (शोक सभाओं) का आयोजन होता है जिनमें कर्बला की घटना को याद किया जाता है, और लोग एक-दूसरे को श्रद्धांजलि स्वरूप Wishes भेजते हैं।
इसी विषय पर और संदेश कहां मिलेंगे?
श्रद्धांजलि से जुड़े संदेशों के लिए Wishes पेज पर जाया जा सकता है।

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