Frequently Asked Questions
चेहलुम (अरबईन) क्या है और यह किस घटना से जुड़ा है?
चेहलुम, जिसे अरबईन भी कहा जाता है, इमाम हुसैन की शहादत के चालीस दिन बाद मनाया जाने वाला शोक दिवस है। यह कर्बला की घटना से जुड़ा है, जहां इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अत्याचार के विरुद्ध बलिदान दिया था।
इसकी तारीख हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्यों बदलती रहती है?
चेहलुम इस्लामी हिजरी (चंद्र) कैलेंडर की सफ़र माह की 20 तारीख को पड़ता है, और चूंकि हिजरी कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। चांद दिखने पर आधारित होने के कारण सटीक तारीख में एक दिन का अंतर भी संभव है।
शिया मुसलमान इस दिन को किस तरह याद करते हैं?
दुनियाभर में, विशेषकर इराक के कर्बला शहर में, लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके इमाम हुसैन के रौज़े तक पहुंचते हैं। मजलिसों (शोक सभाओं) का आयोजन होता है जिनमें कर्बला की घटना को याद किया जाता है, और लोग एक-दूसरे को श्रद्धांजलि स्वरूप Wishes भेजते हैं।
