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भजन संहिता अध्याय 2 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 2 (IRVHIN)
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1 जाति-जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश-देश के लोग क्यों षड्‍यंत्र रचते हैं?

2 यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरुद्ध पृथ्वी के राजागण मिलकर, और हाकिम आपस में षड्‍यंत्र रचकर, कहते हैं,

3 “ आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें, और उनकी रस्सियों को अपने ऊपर से उतार फेंके।”

4 वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हँसेगा, प्रभु उनको उपहास में उड़ाएगा।

5 तब वह उनसे क्रोध में बातें करेगा, और क्रोध में यह कहकर उन्हें भयभीत कर देगा,

6 “मैंने तो अपने चुने हुए राजा को, अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर नियुक्त किया है।”

7 मैं उस वचन का प्रचार करूँगा: जो यहोवा ने मुझसे कहा, “तू मेरा पुत्र है; आज मैं ही ने तुझे जन्माया है।

8 मुझसे माँग, और मैं जाति-जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर-दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूँगा।

9 तू उन्हें लोहे के डंडे से टुकड़े-टुकड़े करेगा। तू कुम्हार के बर्तन के समान उन्हें चकनाचूर कर डालेगा।”

10 इसलिए अब, हे राजाओं, बुद्धिमान बनो; हे पृथ्वी के शासकों, सावधान हो जाओ।

11 डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और काँपते हुए मगन हो।

12 पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ, क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है। धन्य है वे जो उसमें शरण लेते है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalms 2 about?
The psalm describes the nations and their kings raging and plotting against the LORD and 'his anointed' (v.1-3), while God in heaven laughs at their opposition (v.4).
What does Psalms 2:7 mean by 'Thou art my Son, this day have I begotten thee'?
It's part of a decree the psalmist quotes God declaring over his anointed king, promising him the nations as an inheritance (v.7-8), a verse later quoted in Hebrews 5:5.
What does 'Kiss the Son' mean in Psalms 2:12?
The psalm closes with a warning to earth's kings and judges to submit to God's anointed son, 'lest he be angry, and ye perish from the way' (v.12), promising blessing to those who trust in him instead.