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Thaipusam Quotes

Most Famous Thaipusam Quotes of All Time!

We have created a collection of some of the best thaipusam quotes so you can read and share anytime with your friends and family.

कावड़ी यात्रा का हर कदम भगवान मुरुगन के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

Kaavadi yatra ka har kadam Bhagwan Murugan ke prati bhakton ki atoot shraddha ko darshaata hai.

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विश्वास इतना गहरा हो कि हर कठिनाई भी भक्ति और समर्पण में बदल जाए - यही है थाईपुसम का संदेश।

Vishwas itna gehra ho ki har kathinai bhi bhakti aur samarpan me badal jaaye - yahi hai Thaipusam ka sandesh.

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तमिल भक्तों की यह पुरातन परंपरा सदियों से आस्था और भक्ति की मशाल जलाए हुए है।

Tamil bhakton ki yeh puraatan parampara sadiyon se aastha aur bhakti ki mashaal jalaaye hue hai.

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सच्ची भक्ति वही है जो त्याग और समर्पण से भरी हो, यही सिखाता है थाईपुसम।

Sacchi bhakti wahi hai jo tyaag aur samarpan se bhari ho, yahi sikhaata hai Thaipusam.

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Frequently Asked Questions

थाईपुसम कोट्स किस भावना को दर्शाते हैं?
ये पंक्तियां भक्ति में त्याग और समर्पण के महत्व को उजागर करती हैं, जैसे 'सच्ची भक्ति वही है जो त्याग और समर्पण से भरी हो, यही सिखाता है थाईपुसम।'
थाइपुसम पर्व क्या है?
थाइपुसम एक तमिल हिंदू पर्व है जो भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है। यह तमिल पंचांग के "थाई" महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और तमिलनाडु के साथ-साथ मलेशिया, सिंगापुर और श्रीलंका में भी बड़े स्तर पर मनाया जाता है, जहाँ बड़ी तमिल-भाषी आबादी रहती है।
थाईपुसम पर इन कोट्स का इस्तेमाल कैसे होता है?
भगवान मुरुगन को समर्पित इस तमिल पर्व पर, कावड़ी यात्रा और व्रत की परंपरा के साथ भक्ति भाव जताने के लिए इन्हें साझा किया जाता है।
इस पर्व में "कावड़ी" की क्या भूमिका है?
भक्त भगवान मुरुगन के प्रति अपनी आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए "कावड़ी" (सजी हुई लकड़ी की संरचना) कंधे पर उठाकर पैदल यात्रा करते हैं। कुछ अत्यंत श्रद्धालु भक्त शरीर पर छोटे भाले (वेल) चुभाकर भी अपनी आस्था प्रदर्शित करते हैं, जो गहरी तपस्या और मन्नत पूरी होने का प्रतीक माना जाता है।
बधाई संदेश के लिए विकल्प क्या है?
Wishes पेज पर सीधे संदेश उपलब्ध हैं।
इस पर्व की तारीख हर साल क्यों बदलती है?
थाइपुसम की तिथि चंद्र-सौर तमिल पंचांग पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह हर साल जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में अलग-अलग तारीख पर पड़ता है। भक्तजन इस अवसर पर Quotes और Wishes के जरिए अपनी श्रद्धा साझा करते हैं।

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