मन की पीड़ा मन में ही रखो
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रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनी अठिलैहैं लोग सब, बाँट न लैहैं कोय। — रहीम
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रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय। सुनी अठिलैहैं लोग सब, बाँट न लैहैं कोय। — रहीम
