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Navgraha Chalisa (Full Text in Hindi)

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Complete text of the Shri Navgraha Chalisa, composed by Sundardas — a devotional hymn addressing the nine celestial bodies of Vedic astrology in turn: Surya (Sun), Chandra (Moon), Mangal (Mars), Budh (Mercury), Guru (Jupiter), Shukra (Venus), Rahu and Ketu, seeking their combined grace and relief from planetary affliction.

दोहा
श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित शिरनाय।
नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥
जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहुं अनुग्रह आज॥

चौपाई
प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा। करहुं कृपा जनि जानि अनाथा॥
हे आदित्य दिवाकर भानु। मैं मति मंद महा अज्ञानू॥
अब निज जन कहं हरहु कलेशा। दिनकर द्वादश रूप दिनेशा॥
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर। अर्कमित्र अघ मोघ क्षमाकर॥
शशि मयंक रजनीपति स्वामी। चन्द्र कलानिधि नमो नमामि॥
राकापति हिमांशु राकेशा। प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा॥
सोम इन्दु विधु शांति सुधाकर। शीत रश्मि औषधि निशाकर॥
तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा। शरण शरण जन हरहु कलेशा॥
जय जय मंगल सुख दाता। लौहित भौमादिक विख्याता॥
अंगारक कुज रुज रणहारी। देय करहु यहि विनय हमारी॥
जय शशि नंदन बुध महाराजा। करहु सकल जन कहँ शुभ काजा॥
दीजै बुद्धिबल सुमति सुजाना। कठिन कष्ट हरी करी कल्याणा॥
हे तारासुत रोहिणी नंदन। चंद्र सुवन दुःख द्वंद निकन्दन॥
पूजहु आस दास कहूँ स्वामी। प्रणत पाल प्रभु नमो नमामि॥
जयति जयति जय श्री गुरु देवा। करहु सदा तुम्हरी प्रभु सेवा॥
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी। इन्द्र पुरोहित विद्या दानी॥
शुक्र देव पद तल जल जाता। दास निरंतर ध्यान लगाता॥
हे उशना भार्गव भृगु नंदन। दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन॥
जय जय राहू गगन प्रविसइया। तुम्ही चंद्र आदित्य ग्रसईया॥
रवि शशि अरि सर्वभानु धारा। शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा॥
सैंहिकेय तुम निशाचर राजा। अर्धकाय जग राखहु लाजा॥
यदि ग्रह समय पाय कहिं आवहु। सदा शान्ति और सुखा उपजवाहू॥
जय श्री केतु कठिन दुखहारी। करहु सृजन हित मंगलकारी॥
ध्वजयुक्त रुण्ड रूप विकराला। घोर रौद्रतन अधमन काला॥
शिखी तारिका ग्रह बलवाना। महा प्रताप न तेज ठिकाना॥
वाहन मीन महा शुभकारी। दीजै शान्ति दया उर धारी॥

दोहा
धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार।
चित नव मंगल मोद गृह, जगत जनन सुखद्वार॥
यह चालीसा नवग्रह, विरचित सुन्दरदास।
जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगि परम पद पावै॥

Transliteration (opening): Jai Jai Ravi Shashi Som Budh, Jai Guru Bhrigu Shani Raj. Jayati Rahu Aru Ketu Grah, Karahun Anugrah Aaj.

Meaning: Victory to Surya, Chandra, Mercury; victory to Jupiter, Venus and King Shani; victory to Rahu and Ketu — grant your grace today. The chalisa then addresses each planet individually, seeking relief from hardship and requesting peace, wisdom and well-being.
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Complete text of the Shri Navgraha Chalisa, composed by Sundardas — a devotional hymn addressing the nine celestial bodies of Vedic astrology in turn: Surya (Sun), Chandra (Moon), Mangal (Mars), Budh (Mercury), Guru (Jupiter), Shukra (Venus), Rahu and Ketu, seeking their combined grace and relief from planetary affliction.

दोहा
श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित शिरनाय।
नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥
जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहुं अनुग्रह आज॥

चौपाई
प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा। करहुं कृपा जनि जानि अनाथा॥
हे आदित्य दिवाकर भानु। मैं मति मंद महा अज्ञानू॥
अब निज जन कहं हरहु कलेशा। दिनकर द्वादश रूप दिनेशा॥
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर। अर्कमित्र अघ मोघ क्षमाकर॥
शशि मयंक रजनीपति स्वामी। चन्द्र कलानिधि नमो नमामि॥
राकापति हिमांशु राकेशा। प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा॥
सोम इन्दु विधु शांति सुधाकर। शीत रश्मि औषधि निशाकर॥
तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा। शरण शरण जन हरहु कलेशा॥
जय जय मंगल सुख दाता। लौहित भौमादिक विख्याता॥
अंगारक कुज रुज रणहारी। देय करहु यहि विनय हमारी॥
जय शशि नंदन बुध महाराजा। करहु सकल जन कहँ शुभ काजा॥
दीजै बुद्धिबल सुमति सुजाना। कठिन कष्ट हरी करी कल्याणा॥
हे तारासुत रोहिणी नंदन। चंद्र सुवन दुःख द्वंद निकन्दन॥
पूजहु आस दास कहूँ स्वामी। प्रणत पाल प्रभु नमो नमामि॥
जयति जयति जय श्री गुरु देवा। करहु सदा तुम्हरी प्रभु सेवा॥
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी। इन्द्र पुरोहित विद्या दानी॥
शुक्र देव पद तल जल जाता। दास निरंतर ध्यान लगाता॥
हे उशना भार्गव भृगु नंदन। दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन॥
जय जय राहू गगन प्रविसइया। तुम्ही चंद्र आदित्य ग्रसईया॥
रवि शशि अरि सर्वभानु धारा। शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा॥
सैंहिकेय तुम निशाचर राजा। अर्धकाय जग राखहु लाजा॥
यदि ग्रह समय पाय कहिं आवहु। सदा शान्ति और सुखा उपजवाहू॥
जय श्री केतु कठिन दुखहारी। करहु सृजन हित मंगलकारी॥
ध्वजयुक्त रुण्ड रूप विकराला। घोर रौद्रतन अधमन काला॥
शिखी तारिका ग्रह बलवाना। महा प्रताप न तेज ठिकाना॥
वाहन मीन महा शुभकारी। दीजै शान्ति दया उर धारी॥

दोहा
धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार।
चित नव मंगल मोद गृह, जगत जनन सुखद्वार॥
यह चालीसा नवग्रह, विरचित सुन्दरदास।
जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगि परम पद पावै॥

Transliteration (opening): Jai Jai Ravi Shashi Som Budh, Jai Guru Bhrigu Shani Raj. Jayati Rahu Aru Ketu Grah, Karahun Anugrah Aaj.

Meaning: Victory to Surya, Chandra, Mercury; victory to Jupiter, Venus and King Shani; victory to Rahu and Ketu — grant your grace today. The chalisa then addresses each planet individually, seeking relief from hardship and requesting peace, wisdom and well-being.

Navgraha Chalisa