मन रुकना चाहे तब भी आशा कदम चलाती रहती है
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जब थकान और निराशा मन को रुकने के लिए कहती है, तब भीतर बची हुई थोड़ी सी आशा ही कदमों को आगे बढ़ाती रहती है।
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जब थकान और निराशा मन को रुकने के लिए कहती है, तब भीतर बची हुई थोड़ी सी आशा ही कदमों को आगे बढ़ाती रहती है।
