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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

— गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का यह प्रारंभिक अंश अत्यंत लोकप्रिय भजन है।
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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

— गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का यह प्रारंभिक अंश अत्यंत लोकप्रिय भजन है।

Hanuman Bhajan