संध्या आरती दीप जलाओ, मंदिर में हो उजियारा।
घंटी की ध्वनि गूंजे चारों ओर, मन हो प्रभु का प्यारा॥
शाम ढले जब सूरज जाए,
प्रभु का दर्शन सबको भाए।
संध्या आरती दीप जलाओ, मंदिर में हो उजियारा॥
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संध्या आरती दीप जलाओ, मंदिर में हो उजियारा।
घंटी की ध्वनि गूंजे चारों ओर, मन हो प्रभु का प्यारा॥
शाम ढले जब सूरज जाए,
प्रभु का दर्शन सबको भाए।
संध्या आरती दीप जलाओ, मंदिर में हो उजियारा॥
