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आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला॥

श्रवण में मकराकृत कुंडल,
नयन में मस्तक तिलक सोहे।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥
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आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला॥

श्रवण में मकराकृत कुंडल,
नयन में मस्तक तिलक सोहे।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

Aarti Krishna Bhajan