दार्शनिक स्टेटस
जीवन के गहरे अनुभव से निकली सोच।
यह दार्शनिक स्टेटस उस विडंबना को उजागर करता है कि इंसान अक्सर वहां बोल पड़ता है जहां चुप रहना बेहतर होता, और वहां चुप रह जाता है जहां बोलना ज़रूरी था। ऐसी और सोच भरी पंक्तियों के लिए darshanik shayari देखें।
कहां पर बोलना है
और कहां पर बोल जाते हैं !!
जहां चुप रहना है
वहां लोग मुह खोल जाते हैं !!
Kahaan par bolana hai
Aur kahaan par bol jaate hain !!
Jahaan chup rahana hai
Vahaan log muh khol jaate hain !!
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Frequently Asked Questions
What observation does this Darshanik status make?
Is this a personal complaint or a general observation?
Where else can I find reflective lines like this?
सही समय पर सही बात कहने की समझ हर किसी में नहीं होती, और यही फर्क समझदार और जल्दबाज़ इंसान में दिखता है। इसी विषय पर और पंक्तियों के लिए attitude status भी देखें।
