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भजन संहिता अध्याय 98 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 98 (IRVHIN)
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1 यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्‍चर्यकर्म किए हैं! उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है!

2 यहोवा ने अपना किया हुआ उद्धार प्रकाशित किया, उसने अन्यजातियों की दृष्टि में अपना धर्म प्रगट किया है।

3 उसने इस्राएल के घराने पर की अपनी करुणा और सच्चाई की सुधि ली, और पृथ्वी के सब दूर-दूर देशों ने हमारे परमेश्वर का किया हुआ उद्धार देखा है।

4 हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा का जयजयकार करो; उत्साहपूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ!

5 वीणा बजाकर यहोवा का भजन गाओ, वीणा बजाकर भजन का स्वर सुनाओ।

6 तुरहियां और नरसिंगे फूँक फूँककर यहोवा राजा का जयजयकार करो।

7 समुद्र और उसमें की सब वस्तुएँ गरज उठें; जगत और उसके निवासी महाशब्द करें!

8 नदियाँ तालियाँ बजाएँ; पहाड़ मिलकर जयजयकार करें।

9 यह यहोवा के सामने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश-देश के लोगों का न्याय करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 98 about?
It calls for a "new song" because God has done marvellous things and made his salvation known openly in the sight of the heathen (vv.1-2).
What instruments are mentioned in Psalm 98?
Verses 5-6 mention the harp, trumpets, and the sound of the cornet used to make a joyful noise before the LORD.
How does Psalm 98 end?
It ends with the floods clapping their hands and the hills being joyful together before the LORD, who comes to judge the earth with righteousness (vv.8-9).