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भजन संहिता अध्याय 60 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 60 (IRVHIN)
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1 हे परमेश्वर, तूने हमको त्याग दिया, और हमको तोड़ डाला है; तू क्रोधित हुआ; फिर हमको ज्यों का त्यों कर दे।

2 तूने भूमि को कँपाया और फाड़ डाला है; उसके दरारों को भर दे, क्योंकि वह डगमगा रही है।

3 तूने अपनी प्रजा को कठिन समय दिखाया; तूने हमें लड़खड़ा देनेवाला दाखमधु पिलाया है।

4 तूने अपने डरवैयों को झण्डा दिया है, कि वह सच्चाई के कारण फहराया जाए। (सेला)

5 तू अपने दाहिने हाथ से बचा, और हमारी सुन ले कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएँ।

6 परमेश्वर पवित्रता के साथ बोला है, “मैं प्रफुल्लित होऊँगा; मैं शेकेम को बाँट लूँगा, और सुक्कोत की तराई को नपवाऊँगा।

7 गिलाद मेरा है; मनश्शे भी मेरा है; और एप्रैम मेरे सिर का टोप, यहूदा मेरा राजदण्ड है।

8 मोआब मेरे धोने का पात्र है; मैं एदोम पर अपना जूता फेंकूँगा; हे पलिश्तीन, मेरे ही कारण जयजयकार कर।”

9 मुझे गढ़वाले नगर में कौन पहुँचाएगा? एदोम तक मेरी अगुआई किसने की है?

10 हे परमेश्वर, क्या तूने हमको त्याग नहीं दिया? हे परमेश्वर, तू हमारी सेना के साथ नहीं जाता।

11 शत्रु के विरुद्ध हमारी सहायता कर, क्योंकि मनुष्य की सहायता व्यर्थ है।

12 परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएँगे, क्योंकि हमारे शत्रुओं को वही रौंदेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What does Psalm 60 lament?
Psalm 60 laments a national defeat -- 'thou hast cast us off, thou hast scattered us' (v.1) -- then shifts to God's own declaration of territorial claims over Shechem, Succoth, Gilead, Moab, and Edom (vv.6-8), closing with a plea for help since 'vain is the help of man' (v.11).
What does verse 8 mean by 'Moab is my washpot'?
It's God's own boastful claim of dominance over Moab and Edom, treating them as conquered territory used for the lowliest tasks, imagery connected to the victories described in 2 Samuel 8:12-13.
How does the psalm end?
It ends with confidence that comes only through God: 'Through God we shall do valiantly: for he it is that shall tread down our enemies' (v.12).