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भजन संहिता अध्याय 112 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 112 (IRVHIN)
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1 यहोवा की स्तुति करो! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है!

2 उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी।

3 उसके घर में धन-सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा।

4 सीधे लोगों के लिये अंधकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।

5 जो व्यक्ति अनुग्रह करता और उधार देता है, और ईमानदारी के साथ अपने काम करता है, उसका कल्याण होता है।

6 वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।

7 वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।

8 उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिए वह न डरेगा, वरन् अपने शत्रुओं पर दृष्टि करके सन्तुष्ट होगा।

9 उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा; और उसका सींग आदर के साथ ऊँचा किया जाएगा।

10 दुष्ट इसे देखकर कुढ़ेगा; वह दाँत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 112 about?
It describes the blessings that come to someone who fears the LORD and delights in his commandments: wealth, an enduring legacy, and freedom from fear of bad news (vv.1-8).
What does verse 7 say about facing bad news?
V.7 says such a person "shall not be afraid of evil tidings," because "his heart is fixed, trusting in the LORD."
How does the psalm describe the wicked by contrast?
The final verse (v.10) says "the wicked shall see it, and be grieved... the desire of the wicked shall perish," contrasting their fate with the blessed man's security. This psalm closely mirrors Psalms 111 in structure.