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भजन संहिता अध्याय 101 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 101 (IRVHIN)
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1 मैं करुणा और न्याय के विषय गाऊँगा; हे यहोवा, मैं तेरा ही भजन गाऊँगा।

2 मैं बुद्धिमानी से खरे मार्ग में चलूँगा। तू मेरे पास कब आएगा? मैं अपने घर में मन की खराई के साथ अपनी चाल चलूँगा;

3 मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊँगा। मैं कुमार्ग पर चलनेवालों के काम से घिन रखता हूँ; ऐसे काम में मैं न लगूँगा।

4 टेढ़ा स्वभाव मुझसे दूर रहेगा; मैं बुराई को जानूँगा भी नहीं।

5 जो छिपकर अपने पड़ोसी की चुगली खाए, उसका मैं सत्यानाश करूँगा; जिसकी आँखें चढ़ी हों और जिसका मन घमण्डी है, उसकी मैं न सहूँगा।

6 मेरी आँखें देश के विश्वासयोग्य लोगों पर लगी रहेंगी कि वे मेरे संग रहें; जो खरे मार्ग पर चलता है वही मेरा सेवक होगा।

7 जो छल करता है वह मेरे घर के भीतर न रहने पाएगा; जो झूठ बोलता है वह मेरे सामने बना न रहेगा।

8 प्रति भोर, मैं देश के सब दुष्टों का सत्यानाश किया करूँगा, ताकि यहोवा के नगर के सब अनर्थकारियों को नाश करूँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 101 about?
It's David's personal resolve to live with integrity - "I will behave myself wisely in a perfect way" and "walk within my house with a perfect heart" (v.2).
What does David say he won't tolerate in Psalm 101?
Verses 5 and 7 say he will cut off whoever slanders his neighbour privily, and that a deceitful person or liar will not dwell in his house.
How does Psalm 101 end?
It ends with David's determination to "early destroy all the wicked of the land; that I may cut off all wicked doers from the city of the LORD" (v.8).