इन्सान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनों से ठोकर खा के आता है।
feelthewords.com
इन्सान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनों से ठोकर खा के आता है।
Insan ka vyaktitv tab hi ubhar ke aata hai jab woh apno se thokar kha ke aata hai.
