Tailang Swami Jayanti Quotes & Wishes
Remembering a Varanasi ascetic devotees revered as Shiva himself.
Tailang Swami Jayanti honours the birth anniversary of Trailanga Swami, a Shaiva ascetic born in present-day Andhra Pradesh who spent decades in spiritual practice before settling in Varanasi, where devotees came to revere him as 'the walking Shiva'. Mark the day with a line from our Quotes collection or send Wishes to fellow devotees.
Frequently Asked Questions
तैलंग स्वामी जयंती क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
तैलंग स्वामी जयंती वाराणसी के महान संत तैलंग स्वामी की जन्म-जयंती के रूप में मनाई जाती है। भक्त उन्हें शिव का अवतार मानते थे, इसलिए उन्हें अक्सर "वाराणसी के चलते-फिरते शिव" कहा जाता है। यह दिन उनके जीवन, तप और आध्यात्मिक शिक्षाओं को स्मरण करने का अवसर होता है।
तैलंग स्वामी जयंती 2027 में कब है?
तैलंग स्वामी जयंती हर वर्ष पौष शुक्ल एकादशी तिथि को मनाई जाती है, जो पौष पुत्रदा एकादशी के साथ ही पड़ती है। चूँकि यह चंद्र पंचांग पर आधारित तिथि है, इसकी ग्रेगोरियन तारीख हर साल बदलती है; अगला अवसर 19 जनवरी 2027 को है।
तैलंग स्वामी कौन थे?
तैलंग स्वामी एक महान हठयोगी और सिद्ध संत थे, जिन्हें परंपरा के अनुसार लगभग 280 वर्ष (1607-1887 ई.) की असाधारण आयु प्राप्त हुई थी। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन वाराणसी की गलियों और गंगा तट पर तपस्या करते हुए बिताया।
तैलंग स्वामी को "वाराणसी का चलता-फिरता शिव" क्यों कहा जाता है?
उनकी असाधारण योग-सिद्धियों, वैराग्य और दिव्य आभा के कारण भक्तगण उन्हें भगवान शिव का साक्षात अवतार मानते थे। उनके नाम के साथ जुड़ी अनेक कथाएँ आज भी वाराणसी में श्रद्धा के साथ सुनाई जाती हैं।
इस दिन का पौष पुत्रदा एकादशी से क्या संबंध है?
तैलंग स्वामी जयंती उसी तिथि - पौष शुक्ल एकादशी - को पड़ती है जिस दिन पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत भी रखा जाता है। इस तरह यह दिन एक साथ दो अलग-अलग परंपराओं का सम्मिलित उत्सव बन जाता है।
तैलंग स्वामी जयंती कैसे मनाई जाती है?
भक्त इस दिन उपवास, ध्यान और गंगा-स्नान करते हैं, वाराणसी के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, और लोग एक-दूसरे को शुभकामना संदेश भेजकर इस अवसर को याद करते हैं।
क्या तैलंग स्वामी पर आधारित शायरी और कोट्स भी उपलब्ध हैं?
सोशल मीडिया पर इस दिन के लिए कौन से संदेश भेजे जा सकते हैं?
छोटे और सारगर्भित स्टेटस संदेश व्हाट्सऐप और फेसबुक पर साझा करने के लिए उपयुक्त हैं, जो स्वामी जी के तप और आशीर्वाद की भावना को संक्षेप में व्यक्त करते हैं।
तैलंग स्वामी की शिक्षाओं का आज भी क्या महत्व है?
उनकी शिक्षाएँ वैराग्य, संयम और आत्म-साक्षात्कार पर केंद्रित थीं। आज भी वाराणसी में उनके नाम से जुड़े स्थान श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ के समान माने जाते हैं, और उनकी जयंती इन मूल्यों को स्मरण करने का अवसर देती है।
