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Paryushan Parva

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Frequently Asked Questions

पर्युषण पर्व क्या है और यह कब मनाया जाता है?
पर्युषण जैन धर्म का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जो भाद्रपद माह में जैन पंचांग के अनुसार आता है। श्वेतांबर परंपरा में यह आमतौर पर आठ दिनों तक और दिगंबर परंपरा में "दशलक्षण पर्व" के रूप में दस दिनों तक मनाया जाता है। चूँकि तिथि जैन चंद्र पंचांग पर निर्भर करती है, इसलिए हर वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख थोड़ी आगे-पीछे होती रहती है।
पर्युषण के दौरान क्या किया जाता है?
इस दौरान जैन अनुयायी उपवास, आत्म-चिंतन, ध्यान और धार्मिक प्रवचन सुनने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। कई लोग "अठाई" (आठ दिन का उपवास) या दीर्घ उपवास रखते हैं और अहिंसा, सत्य व संयम के सिद्धांतों का पालन करने का प्रयास करते हैं।
पर्युषण का समापन किस प्रकार होता है?
पर्व के अंतिम दिन "संवत्सरी" मनाई जाती है, जब लोग एक-दूसरे से क्षमा-याचना करते हुए "मिच्छामि दुक्कडम" कहते हैं — यानी जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा माँगते और देते हैं। यह क्षमा-भाव इस पर्व की आत्मा माना जाता है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को Wishes भेजते हैं और आध्यात्मिक Quotes साझा करते हैं।