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Narak Chaturdashi Quotes, Wishes & Status

Choti Diwali: the eve that lights the way to the main festival.

Narak Chaturdashi, widely known as Choti Diwali, falls on the fourteenth day of Krishna Paksha in the month of Kartik, one day before the main Diwali. It commemorates Lord Krishna's defeat of the demon Narakasura, freeing his captives and restoring dharma. Browse Quotes or send Wishes for the occasion.

Frequently Asked Questions

नरक चतुर्दशी क्या है और इसे छोटी दिवाली क्यों कहा जाता है?
नरक चतुर्दशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है, जो मुख्य दिवाली से एक दिन पहले आता है। इसी वजह से इसे आम बोलचाल में "छोटी दिवाली" कहा जाता है, क्योंकि यह बड़ी दिवाली उत्सव की शुरुआत का संकेत देती है। इसे कई क्षेत्रों में "काली चौदस" और "रूप चतुर्दशी" के नाम से भी जाना जाता है।
नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा क्या है?
पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस नरकासुर ने अपने अत्याचार से 16,000 स्त्रियों को बंदी बना रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर इसी तिथि को नरकासुर का वध किया और उन सभी स्त्रियों को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
अभ्यंग स्नान क्या है और इसे नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है?
अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में तिल के तेल और उबटन से किए जाने वाले विशेष स्नान को कहा जाता है। मान्यता है कि इस स्नान से शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है और नरक (यानी बुरे कर्मों के फल) से मुक्ति मिलती है। इसीलिए इस परंपरा को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जोड़कर देखा जाता है।
यम दीपक की परंपरा क्या है?
नरक चतुर्दशी की शाम को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे "यम दीपक" कहा जाता है। यह दीपक मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होता है, और इसे जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होने की मान्यता है।
नरक चतुर्दशी दिवाली से एक दिन पहले ही क्यों मनाई जाती है?
हिंदू पंचांग में आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सीधे अमावस्या से पहले आती है, और अमावस्या को ही मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजा) मनाई जाती है। इसी क्रम के कारण नरक चतुर्दशी हमेशा दिवाली से ठीक एक दिन पहले पड़ती है, चाहे यह किसी भी वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर की किसी भी तारीख पर क्यों न हो।
नरक चतुर्दशी 2026 में किस दिन पड़ रही है?
चूंकि यह तिथि चंद्र पंचांग पर आधारित है, इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। वर्ष 2026 में ज़्यादातर पंचांग नरक चतुर्दशी को 7 नवंबर बता रहे हैं, यानी मुख्य दिवाली से ठीक एक दिन पहले - हालांकि इस साल तिथि की गणना में मामूली अंतर के चलते कुछ पंचांगों में 8 नवंबर भी दर्ज है। भविष्य में इसकी सही तारीख जानने के लिए उस वर्ष के पंचांग की जांच करना सबसे विश्वसनीय तरीका रहेगा।
नरक चतुर्दशी पर घर की सफाई और उबटन का क्या महत्व है?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर उबटन लगाना और स्नान करना एक पुरानी परंपरा है, जिसे "रूप चतुर्दशी" नाम से भी जाना जाता है - यानी सुंदरता और निखार का दिन। साथ ही इस दिन घर की अतिरिक्त सफाई और दीप सजावट भी शुरू हो जाती है, ताकि अगले दिन आने वाली लक्ष्मी पूजा के लिए घर पूरी तरह तैयार रहे।
क्या नरक चतुर्दशी और काली चौदस एक ही पर्व है?
हां, कई क्षेत्रों - खासकर गुजरात और महाराष्ट्र में - इसी दिन को "काली चौदस" के नाम से मनाया जाता है, जहां मां काली की पूजा पर विशेष जोर दिया जाता है। नाम भले ही अलग-अलग हों, पर्व की तिथि और मूल भावना - बुराई और भय से मुक्ति - एक ही रहती है।
नरक चतुर्दशी पर पटाखे और दीप जलाने की परंपरा क्यों है?
नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय की खुशी में दीप जलाना और आतिशबाजी करना कई इलाकों में प्रचलित है, जो असल में अगले दिन की भव्य दिवाली उत्सव की शुरुआत जैसा माहौल बना देता है। यही वजह है कि इस दिन को "छोटी दिवाली" कहकर मुख्य पर्व का प्रस्तावना दिवस माना जाता है।
नरक चतुर्दशी की शुभकामनाएं और शायरी कहां साझा करें?
अगर आप इस अवसर पर अपनों को संदेश भेजना चाहते हैं, तो हमारे शुभकामना संदेश, शायरी और कोट्स के संग्रह से मनपसंद शब्द चुन सकते हैं, जो इस पर्व की खुशी और भक्ति दोनों को बयां करते हैं। इसके अलावा स्टेटस सेक्शन में भी छोटे और आकर्षक संदेश मिल जाएंगे।

The day traditionally begins with an Abhyang Snan, a pre-dawn ritual oil bath believed to cleanse body and soul, followed by the lighting of diyas in the evening ahead of the main festival. Share it through Shayari or a Status update.