संकीर्तन की धूम मची है, चारों ओर भक्ति का मेला।
नाचें गाएं सब भक्तजन, यह है प्रभु का अनोखा खेला॥
मृदंग बजे और करताल बाजे,
भक्ति के सुर हर मन में साजे।
संकीर्तन की धूम मची है, चारों ओर भक्ति का मेला॥
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संकीर्तन की धूम मची है, चारों ओर भक्ति का मेला।
नाचें गाएं सब भक्तजन, यह है प्रभु का अनोखा खेला॥
मृदंग बजे और करताल बाजे,
भक्ति के सुर हर मन में साजे।
संकीर्तन की धूम मची है, चारों ओर भक्ति का मेला॥
