अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, औ सारी दुनिया वाली॥
शेर पे सवारी करती हो,
त्रिशूल हाथ में धरती हो।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली॥
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अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, औ सारी दुनिया वाली॥
शेर पे सवारी करती हो,
त्रिशूल हाथ में धरती हो।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली॥
