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भजन संहिता अध्याय 87 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 87 (IRVHIN)
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1 उसकी नींव पवित्र पर्वतों में है;

2 और यहोवा सिय्योन के फाटकों से याकूब के सारे निवासों से बढ़कर प्रीति रखता है।

3 हे परमेश्वर के नगर, तेरे विषय महिमा की बातें कही गई हैं। (सेला)

4 मैं अपने जान-पहचानवालों से रहब और बाबेल की भी चर्चा करूँगा; पलिश्त, सोर और कूश को देखो: “ यह वहाँ उत्पन्न हुआ था।”

5 और सिय्योन के विषय में यह कहा जाएगा, “इनमें से प्रत्येक का जन्म उसमें हुआ था।” और परमप्रधान आप ही उसको स्थिर रखे।

6 यहोवा जब देश-देश के लोगों के नाम लिखकर गिन लेगा, तब यह कहेगा, “यह वहाँ उत्पन्न हुआ था।” (सेला)

7 गवैये और नृतक दोनों कहेंगे, “हमारे सब सोते तुझी में पाए जाते हैं।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 87 about?
It's a short psalm praising Zion, God's chosen city, declaring "glorious things are spoken of thee, O city of God" (v.3).
Which nations are mentioned as being 'born' in Zion in Psalm 87?
Verse 4 mentions Rahab (Egypt) and Babylon, along with Philistia, Tyre, and Ethiopia, as peoples counted among those recorded as born there.
How does Psalm 87 end?
It ends with singers and instrument players declaring, "all my springs are in thee" (v.7), affirming Zion as the source of life and joy for God's people.