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भजन संहिता अध्याय 75 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 75 (IRVHIN)
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1 हे परमेश्वर हम तेरा धन्यवाद करते, हम तेरा नाम धन्यवाद करते हैं; क्योंकि तेरा नाम प्रगट हुआ है, तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन हो रहा है।

2 जब ठीक समय आएगा तब मैं आप ही ठीक-ठीक न्याय करूँगा।

3 जब पृथ्वी अपने सब रहनेवालों समेत डोल रही है, तब मैं ही उसके खम्भों को स्थिर करता हूँ। (सेला)

4 मैंने घमण्डियों से कहा, “घमण्ड मत करो,” और दुष्टों से, “सींग ऊँचा मत करो;

5 अपना सींग बहुत ऊँचा मत करो, न सिर उठाकर ढिठाई की बात बोलो।”

6 क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पश्चिम से, और न जंगल की ओर से आती है;

7 परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।

8 यहोवा के हाथ में एक कटोरा है, जिसमें का दाखमधु झागवाला है; उसमें मसाला मिला है, और वह उसमें से उण्डेलता है, निश्चय उसकी तलछट तक पृथ्वी के सब दुष्ट लोग पी जाएँगे।

9 परन्तु मैं तो सदा प्रचार करता रहूँगा, मैं याकूब के परमेश्वर का भजन गाऊँगा।

10 दुष्टों के सब सींगों को मैं काट डालूँगा, परन्तु धर्मी के सींग ऊँचे किए जाएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 75 about?
It's a psalm of thanksgiving where God himself speaks, warning the wicked not to lift up their horn, since "God is the judge: he putteth down one, and setteth up another" (vv.4-7).
What does Psalm 75:6 say about promotion?
"Promotion cometh neither from the east, nor from the west, nor from the south" - meaning exaltation comes from God's judgment, not from any human direction.
What is the cup mentioned in Psalm 75?
Verse 8 describes a cup in the LORD's hand "full of mixture," whose dregs all the wicked of the earth will be made to wring out and drink.