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भजन संहिता अध्याय 6 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 6 (IRVHIN)
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1 हे यहोवा, तू मुझे अपने क्रोध में न डाँट, और न रोष में मुझे ताड़ना दे।

2 हे यहोवा, मुझ पर दया कर, क्योंकि मैं कुम्हला गया हूँ; हे यहोवा, मुझे चंगा कर, क्योंकि मेरी हड्डियों में बेचैनी है।

3 मेरा प्राण भी बहुत खेदित है। और तू, हे यहोवा, कब तक?

4 लौट आ, हे यहोवा, और मेरे प्राण बचा; अपनी करुणा के निमित्त मेरा उद्धार कर।

5 क्योंकि मृत्यु के बाद तेरा स्मरण नहीं होता; अधोलोक में कौन तेरा धन्यवाद करेगा?

6 मैं कराहते-कराहते थक गया; मैं अपनी खाट आँसुओं से भिगोता हूँ; प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है।

7 मेरी आँखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सतानेवालों के कारण वे धुँधला गई हैं।

8 हे सब अनर्थकारियों मेरे पास से दूर हो; क्योंकि यहोवा ने मेरे रोने का शब्द सुन लिया है।

9 यहोवा ने मेरा गिड़गिड़ाना सुना है; यहोवा मेरी प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा।

10 मेरे सब शत्रु लज्जित होंगे और बहुत ही घबराएँगे; वे पराजित होकर पीछे हटेंगे, और एकाएक लज्जित होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What kind of psalm is Psalms 6?
It's a psalm of deep distress, opening with a plea for mercy because the psalmist's bones and soul are 'sore vexed' (v.1-3).
What does Psalms 6:6 describe about the psalmist's grief?
He says he is weary with groaning, makes his bed swim with tears every night, and waters his couch with weeping (v.6).
How does Psalms 6 end?
It shifts from despair to confidence, declaring that the LORD has heard his weeping and supplication and will receive his prayer, while his enemies will be ashamed (v.8-10), a similar turn from lament to trust as in Psalms 88:10-12.