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भजन संहिता अध्याय 47 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 47 (IRVHIN)
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1 हे देश-देश के सब लोगों, तालियाँ बजाओ! ऊँचे शब्द से परमेश्वर के लिये जयजयकार करो!

2 क्योंकि यहोवा परमप्रधान और भययोग्य है, वह सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है।

3 वह देश-देश के लोगों को हमारे सम्मुख नीचा करता, और जाति-जाति को हमारे पाँवों के नीचे कर देता है।

4 वह हमारे लिये उत्तम भाग चुन लेगा, जो उसके प्रिय याकूब के घमण्ड का कारण है। (सेला)

5 परमेश्वर जयजयकार सहित, यहोवा नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है।

6 परमेश्वर का भजन गाओ, भजन गाओ! हमारे महाराजा का भजन गाओ, भजन गाओ!

7 क्योंकि परमेश्वर सारी पृथ्वी का महाराजा है; समझ बूझकर बुद्धि से भजन गाओ।

8 परमेश्वर जाति-जाति पर राज्य करता है; परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान है।

9 राज्य-राज्य के रईस अब्राहम के परमेश्वर की प्रजा होने के लिये इकट्ठे हुए हैं। क्योंकि पृथ्वी की ढालें परमेश्वर के वश में हैं, वह तो शिरोमणि है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 47 about?
Psalm 47 calls all peoples to clap hands and shout praise to God as 'a great King over all the earth' (v.2), celebrating him going up 'with a shout' and 'the sound of a trumpet' (v.5) and reigning over the nations (v.8).
What does verse 5 describe?
It pictures God's enthronement with a triumphant ascent: 'God is gone up with a shout, the LORD with the sound of a trumpet.'
How does the psalm call people to respond to God's kingship?
It repeats the command to 'sing praises' five times in verses 6-7, urging worshippers to sing 'with understanding,' similar to the joyful noise called for in Psalms 98:4.