Logo - Feel The Words
IRVHIN

भजन संहिता अध्याय 32 (IRVHIN)

minutes - words.
भजन संहिता अध्याय 32 (IRVHIN)
किसी पद को हाइलाइट करने के लिए टैप करें

1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो।

2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।

3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गई।

4 क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट बनती गई। (सेला)

5 जब मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, “मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूँगा;” तब तूने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। (सेला)

6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जबकि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तो भी उस भक्त के पास न पहुँचेगी।

7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा। (सेला)

8 मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उसमें तेरी अगुआई करूँगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मति दिया करूँगा।

9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और रास से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।

10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मनवालों आनन्द से जयजयकार करो!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is the main idea of Psalm 32?
Psalm 32 opens by declaring the blessing of forgiveness -- 'Blessed is he whose transgression is forgiven' (v.1) -- then describes the physical toll of hiding sin (vv.3-4) and the relief of confessing it (v.5), before God promises to instruct and guide (v.8).
What does verse 8 promise?
God says 'I will instruct thee and teach thee in the way which thou shalt go: I will guide thee with mine eye,' a guidance theme close to Proverbs 3:5-6's call to trust the LORD rather than lean on your own understanding.
What happened when the psalmist stayed silent about his sin?
Verse 3 says 'When I kept silence, my bones waxed old through my roaring all the day long,' describing physical distress until he confessed in verse 5.