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भजन संहिता अध्याय 20 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 20 (IRVHIN)
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1 संकट के दिन यहोवा तेरी सुन ले! याकूब के परमेश्वर का नाम तुझे ऊँचे स्थान पर नियुक्त करे!

2 वह पवित्रस्थान से तेरी सहायता करे, और सिय्योन से तुझे सम्भाल ले!

3 वह तेरे सब भेंटों को स्मरण करे, और तेरे होमबलि को ग्रहण करे। (सेला)

4 वह तेरे मन की इच्छा को पूरी करे, और तेरी सारी युक्ति को सफल करे!

5 तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊँचे स्वर से हर्षित होकर गाएँगे, और अपने परमेश्वर के नाम से झण्डे खड़े करेंगे। यहोवा तेरे सारे निवेदन स्वीकार करे।

6 अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त को बचाएगा; वह अपने पवित्र स्वर्ग से, अपने दाहिने हाथ के उद्धार के सामर्थ्य से, उसको उत्तर देगा।

7 किसी को रथों पर, और किसी को घोड़ों पर भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।

8 वे तो झुक गए और गिर पड़े: परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं।

9 हे यहोवा, राजा को छुड़ा; जब हम तुझे पुकारें तब हमारी सहायता कर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What's the main theme of Psalm 20?
Psalm 20 is a prayer of intercession for the king before battle, asking the LORD to answer him, send help, and grant victory, closing with the declaration 'Some trust in chariots, and some in horses: but we will remember the name of the LORD our God' (v.7).
What does verse 7 mean by trusting in chariots and horses?
It contrasts military strength with trust in God, a theme also found in Isaiah 31:1, which likewise warns against relying on horses and chariots instead of the LORD.
How does the psalm end?
It closes with a short plea in verse 9: 'Save, LORD: let the king hear us when we call.'