Logo - Feel The Words
IRVHIN

भजन संहिता अध्याय 16 (IRVHIN)

minutes - words.
भजन संहिता अध्याय 16 (IRVHIN)
किसी पद को हाइलाइट करने के लिए टैप करें

1 हे परमेश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूँ।

2 मैंने यहोवा से कहा, “तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।”

3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न हूँ।

4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दुःख बढ़ जाएगा; मैं उन्हें लहूवाले अर्घ नहीं चढ़ाऊँगा और उनका नाम अपने होठों से नहीं लूँगा।

5 यहोवा तू मेरा चुना हुआ भाग और मेरा कटोरा है; मेरे भाग को तू स्थिर रखता है।

6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।

7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूँ, क्योंकि उसने मुझे सम्मति दी है; वरन् मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।

8 मैंने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिए कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊँगा।

9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।

10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को कब्र में सड़ने देगा।

11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What does the psalmist call God in Psalms 16?
He calls the LORD 'the portion of mine inheritance and of my cup' (v.5), saying his goodness doesn't extend to God directly but to the saints on earth whom he delights in (v.2-3).
What does Psalms 16:8 say about keeping God before oneself?
It says, 'I have set the LORD always before me: because he is at my right hand, I shall not be moved' (v.8) — see it at Psalms 16:8.
What does Psalms 16:10 mean about not seeing corruption?
The psalmist expresses confidence that God will not leave his soul in the grave or let his 'Holy One' see corruption (v.10), a verse later applied to the resurrection in Acts 2:28.