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भजन संहिता अध्याय 149 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 149 (IRVHIN)
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1 यहोवा की स्तुति करो! यहोवा के लिये नया गीत गाओ, भक्तों की सभा में उसकी स्तुति गाओ!

2 इस्राएल अपने कर्ता के कारण आनन्दित हो, सिय्योन के निवासी अपने राजा के कारण मगन हों!

3 वे नाचते हुए उसके नाम की स्तुति करें, और डफ और वीणा बजाते हुए उसका भजन गाएँ!

4 क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है; वह नम्र लोगों का उद्धार करके उन्हें शोभायमान करेगा।

5 भक्त लोग महिमा के कारण प्रफुल्लित हों; और अपने बिछौनों पर भी पड़े-पड़े जयजयकार करें।

6 उनके कण्ठ से परमेश्वर की प्रशंसा हो, और उनके हाथों में दोधारी तलवारें रहें,

7 कि वे जाति-जाति से पलटा ले सके; और राज्य-राज्य के लोगों को ताड़ना दें,

8 और उनके राजाओं को जंजीरों से, और उनके प्रतिष्ठित पुरुषों को लोहे की बेड़ियों से जकड़ रखें,

9 और उनको ठहराया हुआ दण्ड देंगे! उसके सब भक्तों की ऐसी ही प्रतिष्ठा होगी। यहोवा की स्तुति करो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 149 about?
It calls Israel to "sing unto the LORD a new song" and praise him "in the dance" with "timbrel and harp" (vv.1-3), because "the LORD taketh pleasure in his people" (v.4).
What is the "two-edged sword" in verse 6 about?
V.6 pairs "the high praises of God" in the mouth of the saints with "a two-edged sword in their hand," describing praise alongside a role in executing judgment on the nations (v.7).
How does the psalm describe the honor given to God's people?
V.9 says, "To execute upon them the judgment written: this honour have all his saints," closing with "Praise ye the LORD."