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भजन संहिता अध्याय 122 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 122 (IRVHIN)
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1 जब लोगों ने मुझसे कहा, “आओ, हम यहोवा के भवन को चलें,” तब मैं आनन्दित हुआ।

2 हे यरूशलेम, तेरे फाटकों के भीतर, हम खड़े हो गए हैं!

3 हे यरूशलेम, तू ऐसे नगर के समान बना है, जिसके घर एक दूसरे से मिले हुए हैं।

4 वहाँ यहोवा के गोत्र-गोत्र के लोग यहोवा के नाम का धन्यवाद करने को जाते हैं; यह इस्राएल के लिये साक्षी है।

5 वहाँ तो न्याय के सिंहासन, दाऊद के घराने के लिये रखे हुए हैं।

6 यरूशलेम की शान्ति का वरदान माँगो, तेरे प्रेमी कुशल से रहें!

7 तेरी शहरपनाह के भीतर शान्ति, और तेरे महलों में कुशल होवे!

8 अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूँगा कि तुझ में शान्ति होवे!

9 अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूँगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 122 about?
It's a psalm of joy about going up to worship in Jerusalem, opening with "I was glad when they said unto me, Let us go into the house of the LORD" (v.1).
What does the psalm ask readers to pray for?
V.6 says, "Pray for the peace of Jerusalem: they shall prosper that love thee," followed by a blessing of peace within its walls (v.7).
What does verse 5 mention about thrones?
V.5 mentions "thrones of judgment, the thrones of the house of David," referencing Jerusalem as the seat of Davidic rule and justice.