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भजन संहिता अध्याय 108 (IRVHIN)

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भजन संहिता अध्याय 108 (IRVHIN)
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1 हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है; मैं गाऊँगा, मैं अपनी आत्मा से भी भजन गाऊँगा।

2 हे सारंगी और वीणा जागो! मैं आप पौ फटते जाग उठूँगा

3 हे यहोवा, मैं देश-देश के लोगों के मध्य में तेरा धन्यवाद करूँगा, और राज्य-राज्य के लोगों के मध्य में तेरा भजन गाऊँगा।

4 क्योंकि तेरी करुणा आकाश से भी ऊँची है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है।

5 हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर हो! और तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर हो!

6 इसलिए कि तेरे प्रिय छुड़ाए जाएँ, तू अपने दाहिने हाथ से बचा ले और हमारी विनती सुन ले!

7 परमेश्वर ने अपनी पवित्रता में होकर कहा है, “मैं प्रफुल्लित होकर शेकेम को बाँट लूँगा, और सुक्कोत की तराई को नपवाऊँगा।

8 गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है; और एप्रैम मेरे सिर का टोप है; यहूदा मेरा राजदण्ड है।

9 मोआब मेरे धोने का पात्र है, मैं एदोम पर अपना जूता फेंकूँगा, पलिश्त पर मैं जयजयकार करूँगा।”

10 मुझे गढ़वाले नगर में कौन पहुँचाएगा? एदोम तक मेरी अगुआई किसने की हैं?

11 हे परमेश्वर, क्या तूने हमको त्याग नहीं दिया?, और हे परमेश्वर, तू हमारी सेना के आगे-आगे नहीं चलता।

12 शत्रुओं के विरुद्ध हमारी सहायता कर, क्योंकि मनुष्य की सहायता व्यर्थ है!

13 परमेश्वर की सहायता से हम वीरता दिखाएँगे, हमारे शत्रुओं को वही रौंदेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is Psalm 108 about?
It opens with a vow to praise God with a "fixed" heart and sing among the nations (vv.1-4), then declares that God has claimed lands like Shechem, Succoth, and Gilead as his own (vv.7-9), closing with a plea for help against Israel's enemies.
What does verse 9 mean by "Moab is my washpot"?
In v.9, "Moab is my washpot" and "over Edom will I cast out my shoe" are pictures of God claiming lordship over neighboring nations, while he says he will "triumph" over Philistia.
How does the psalm end?
It closes on dependence rather than confidence in numbers: "vain is the help of man" (v.12), but "through God we shall do valiantly: for he it is that shall tread down our enemies" (v.13). Compare the similar wording in Psalms 57:7-11.