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यशायाह अध्याय 20 (IRVHIN)

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यशायाह अध्याय 20 (IRVHIN)
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1 जिस वर्ष में अश्शूर के राजा सर्गोन की आज्ञा से तर्त्तान ने अश्दोद आकर उससे युद्ध किया और उसको ले भी लिया,

2 उसी वर्ष यहोवा ने आमोस के पुत्र यशायाह से कहा, “जाकर अपनी कमर का टाट खोल और अपनी जूतियाँ उतार;” अतः उसने वैसा ही किया, और वह नंगा और नंगे पाँव घूमता फिरता था।

3 तब यहोवा ने कहा, “जिस प्रकार मेरा दास यशायाह तीन वर्ष से उघाड़ा और नंगे पाँव चलता आया है, कि मिस्र और कूश के लिये चिन्ह और लक्षण हो,

4 उसी प्रकार अश्शूर का राजा मिस्री और कूश के लोगों को बन्दी बनाकर देश निकाला करेगा, क्या लड़के क्या बूढे़, सभी को बन्दी बनाकर उघाड़े और नंगे पाँव और नितम्ब खुले ले जाएगा, जिससे मिस्र लज्जित हो।

5 तब वे कूश के कारण जिस पर उनकी आशा थी, और मिस्र के हेतु जिस पर वे फूलते थे व्याकुल और लज्जित हो जाएँगे।

6 और समुद्र के इस पार के बसनेवाले उस समय यह कहेंगे, ‘देखो, जिन पर हम आशा रखते थे ओर जिनके पास हम अश्शूर के राजा से बचने के लिये भागने को थे उनकी ऐसी दशा हो गई है। तो फिर हम लोग कैसे बचेंगे’?”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What's the strange sign in Isaiah chapter 20 about?
God commands Isaiah to walk naked and barefoot for three years (v2-3) as a living sign that Assyria will lead away captive Egyptians and Ethiopians in the same humiliating state (v4).
What does 'how shall we escape' in verse 6 express?
It's the fearful reaction of coastal peoples watching Egypt and Ethiopia's downfall, realizing their hoped-for allies can't save them - part of the same Assyrian-crisis era recorded historically in 2 Kings 18:17.
Who is Tartan, mentioned in verse 1?
He's a military commander sent by Sargon king of Assyria, who fought against and captured the city of Ashdod - the event that sets the historical timing for Isaiah's sign-act.