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IRVHIN

यशायाह अध्याय 15 (IRVHIN)

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Isaiah Chapter 15
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1 मोआब के विषय भारी भविष्यद्वाणी। निश्चय मोआब का आर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है; निश्चय मोआब का कीर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है।

2 बैत और दीबोन ऊँचे स्थानों पर रोने के लिये चढ़ गए हैं; नबो और मेदबा के ऊपर मोआब हाय! हाय! करता है। उन सभी के सिर मुँण्ड़े हुए, और सभी की दाढ़ियाँ मुँण्ड़ी हुई हैं;

3 सड़कों में लोग टाट पहने हैं; छतों पर और चौकों में सब कोई आँसू बहाते हुए हाय! हाय! करते हैं।

4 हेशबोन और एलाले चिल्ला रहे हैं, उनका शब्द यहस तक सुनाई पड़ता है; इस कारण मोआब के हथियार-बन्द चिल्ला रहे हैं; उसका जी अति उदास है।

5 मेरा मन मोआब के लिये दुहाई देता है; उसके रईस सोअर और एग्लत-शलीशिया तक भागे जाते हैं। देखो, लूहीत की चढ़ाई पर वे रोते हुए चढ़ रहे हैं; सुनो, होरोनैम के मार्ग में वे नाश होने की चिल्लाहट मचा रहे हैं।

6 निम्रीम का जल सूख गया; घास कुम्हला गई और हरियाली मुर्झा गई, और नमी कुछ भी नहीं रही।

7 इसलिए जो धन उन्होंने बचा रखा, और जो कुछ उन्होंने इकट्ठा किया है, उस सब को वे उस घाटी के पार लिये जा रहे हैं जिसमें मजनू वृक्ष हैं।

8 इस कारण मोआब के चारों ओर की सीमा में चिल्लाहट हो रही है, उसमें का हाहाकार एगलैम और बेरेलीम में भी सुन पड़ता है।

9 क्योंकि दीमोन का सोता लहू से भरा हुआ है; तो भी मैं दीमोन पर और दुःख डालूँगा, मैं बचे हुए मोआबियों और उनके देश से भागे हुओं के विरुद्ध सिंह भेजूँगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What's the 'burden of Moab' about in Isaiah chapter 15?
It's a lament over Moab's coming destruction, describing whole cities - Ar, Kir, Heshbon, Dibon - in mourning, weeping, and fleeing as refugees (v1-6).
Why does Isaiah say his heart cries out for Moab in verse 5?
Notably, Isaiah expresses personal grief over the judgment rather than satisfaction, similar to how Amos 2:1-3 pronounces judgment on a neighboring nation without gloating.
What are the specific place names like Nimrim and Dimon mentioned in this chapter?
They're Moabite towns and waterways named as the geography over which the mourning and destruction spread (v6-9).

Isaiah says his own heart cries out for Moab as fugitives flee toward Zoar and the waters of Dimon run with blood, a judgment on Moab also pronounced in Amos 2:1-3; the lament continues into Isaiah 16.