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IRVHIN

1 यूहन्ना अध्याय 1 (IRVHIN)

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1 यूहन्ना अध्याय 1 (IRVHIN)
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1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हमने सुना, और जिसे अपनी आँखों से देखा, वरन् जिसे हमने ध्यान से देखा और हाथों से छुआ।

2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हमने उसे देखा, और उसकी गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं जो पिता के साथ था और हम पर प्रगट हुआ)।

3 जो कुछ हमने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिए कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है।

4 और ये बातें हम इसलिए लिखते हैं, कि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

5 जो समाचार हमने उससे सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अंधकार नहीं।

6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अंधकार में चलें, तो हम झूठ बोलते हैं और सत्य पर नहीं चलते।

7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं और उसके पुत्र यीशु मसीह का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।

8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आपको धोखा देते हैं और हम में सत्य नहीं।

9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।

10 यदि हम कहें कि हमने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What does this chapter say John and the other apostles are testifying about?
John says he's declaring what he and others have heard, seen, and touched concerning 'the Word of life' (vv.1-3), so that readers may share fellowship with the Father and the Son.
What does 1 John 1:9 promise about confessing sin?
Verse 9 promises that if we confess our sins, God 'is faithful and just to forgive us our sins, and to cleanse us from all unrighteousness,' a pattern of confession also seen in Psalms 32:5.
What does this chapter say about claiming to be without sin?
Verse 8 says if we claim to have no sin, we deceive ourselves and the truth is not in us, and verse 10 adds that denying we've sinned makes God a liar.