असल में माॅं-बाप को लात मारने की प्रथा
औलाद माॅं के पेट से ही शुरू कर देती है,
बस फर्क इतना है कि…
पेट में लात खा के माॅं-बाप फूले नहीं समाते,
लेकिन बुढ़ापे में लात पड़ने पर आंसु रोक नहीं पाते!
feelthewords.com
असल में माॅं-बाप को लात मारने की प्रथा
औलाद माॅं के पेट से ही शुरू कर देती है,
बस फर्क इतना है कि…
पेट में लात खा के माॅं-बाप फूले नहीं समाते,
लेकिन बुढ़ापे में लात पड़ने पर आंसु रोक नहीं पाते!
